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निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर

उदयपुर। शहर के नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार और भूखंड घोटाले, आमजन की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने गुरुवार को नगर निगम परिसर में धरना प्रदर्शन करने के बाद आयुक्त से तीखी नोकझोंक को लेकर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ सूरजपोल थाना पुलिस ने देर रात एफआईआर दर्ज कर दी। कांग्रेस नेता पुलिस की इस कार्रवाई को जनता की आवाज दबाने वाली और भाजपा सरकार के दबाव में किया जाना बता रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कांग्रेस इस तरह के हथकंडों से डरकर बैठने वाली नहीं है चाहे वे कितनी ही ऐसी एफआईआर उनके खिलाफ दर्ज करा दे।
बता दें नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार, 272 भूखंडा घोटाले, अव्यवस्थाओं एवं शहर की बदहाल मूलभूत सुविधाओं के विरोध में उदयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से गुरुवार को अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ के नेतृत्व में नगर निगम प्रांगण में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। बाद में कांग्रेसजनों द्वारा निगम आयुक्त का घेराव कर ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान आयुक्त कार्यालय में कुर्सी पर किसी कांग्रेस कार्यकर्ता चढने को लेकर आयुक्त व कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नौकझोंक हो गई थी। एक बार तो गुस्साए आयुक्त अभिषेक खन्ना ने इस तरह ज्ञापन लेने से ही इंकार करते हुए अपनी सीट से हट गए। बाद में कांग्रेस नेताओं ने अपना पक्ष रखते हुए उन्हें बताया कि वे सुबह 11 बजे से धरना प्रदर्शन कर रहे थे और एक बजे ज्ञापन देना था लेकिन वे नहीं होने के कारण उन्हें इंतजार करना पडा। तब आयुक्त खन्ना ने कांग्रेस नेताओ के हाथों ज्ञापन प्राप्त किया। इस दोरान सबकुछ शांतिपूर्वक सम्पन्न होने के बाद कांग्रेसजन वहां से लौट आए। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सूरजपोल थाने में गुरुवार को रात 8.24 बजे कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। थाने के सहायक उपनिरीक्षक चन्द्रभान सिंह भाटी पुत्र विजय सिंह निवासी भचरडी खैरोदा ने शहर कांग्रेस अध्यक्ष फतहसिंह राठौड, संगठन महामंत्री अरुण टांक, कांग्रेस प्रदेश महासचिव एवं प्रवक्ता पंकज कुमार शर्मा, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष नजमा हुसैन व अज्ञात एक जने के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जिसमें नगर निगम आयुक्त कार्यालय में धरना देने वाले व्यक्ति व महिला आयुक्त कार्यालय में एक साथ प्रवेश कर कुछ व्यक्तियों द्वारा कार्यालय में लगी कुर्सियों पर चढ जाने तथा आयुक्त को ज्ञापन देने के दौरान तीखी नौंकझोक करने व राजकार्य में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया है। मामले की जांच एएसआई यशपाल सिंह को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है। घटनाक्रम से जुडे सारे वीडियो भी मंगवाकर आगे जांच की जाएगी। मौके पर मौजूद कर्मचारियों व नेताओं के बयान भी दर्ज किए जाएंगें। उधर, शहर कांग्रेस अध्यक्ष फतहसिंह राठौड का कहना है कि ज्ञापन के दौरान पीछे किसी कार्यकर्ता के कुर्सी पर चढने से आयुक्त खन्ना आक्रोशित हो गए थे। उन्होंने मौके पर उसे डांट कर समझा दिया था। कुछ देर बाद आयुक्त मान भी गए थे अब ये कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की जा रही है। राठौड ने बताया कि ज्ञापन देने के लिए वे तीन घंटे तक आयुक्त का इंतजार करते रहे लेकिन आयुक्त भाजपा नेताओं के दबाव में थे और वे निगम कार्यालय नहीं पहुंचे। राठौड ने सवाल किया कि लोकतंत्र में ज्ञापन देना भी अपराध है क्या। निगम में भ्रष्टाचार की पोल खुल रही है तो कांग्रेस की आवाज को दबाया जा रहा है।  नगर निगम आयुक्त द्वारा पुलिस प्रशासन के माध्यम से कांग्रेस पदाधिकारियों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज करवाए जाने को कांग्रेस नेताओं ने लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास बताया है। नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के इशारे पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जो प्रशासन की संकीर्ण एवं दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उदयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़, प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश श्रीमाली, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पंकज कुमार शर्मा, राजीव सुवालका, अरुण टांक, मोहसिन खान, दिनेश दवे, राजेश जैन, सुनील रोजर्स, गिरधारी लाल शर्मा, जगदीश कुमावत, हिदायतुल्लाह, ब्लॉक अध्यक्ष सोमेश्वर मीणा, अजय सिंह, मंडल अध्यक्ष ऋतुराज मिश्रा, सत्यनारायण टांक, मयंक खमेसरा, यशवंत पालीवाल, शहजाद खान, नजमा मेवाफरोश, चंदा सुवालका एवं शांता प्रिंस ने संयुक्त वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी इस प्रकार के झूठे मुकदमों से डरने वाली नहीं है। नेताओं ने कहा कि कांग्रेस हमेशा जनता के हक और आवाज की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी लड़ती रहेगी। सच की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। यदि जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ी तो कांग्रेसजन जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।