तीन साल में पूरा होगा देबारी उमरड़ा रेलखंड का दोहरीकरण
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तीन साल में पूरा होगा देबारी उमरड़ा रेलखंड का दोहरीकरण

उदयपुर। रेल यातायात सुदृढ़ करने हेतु उमरड़ा से देबारी के बीच 25 किलोमीटर रेल लाइन के दोहरीकरण की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। सर्वे पूरा होने के बाद रेलवे इंजीनियरों ने गिर्वा एसडीएम को भूमि अवाप्ति के प्रस्ताव सौंप दिए है। भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया शुरू होते ही कार्य शुरू होने की जनभावना है। इस रेलखंड में केवल उन स्थानों पर भूमि अवाप्ति की की जाएगी जहाँ ट्रैक में कर्व है या आसपास बस्तियां विकसित हो चुकी है। ऐसे में सीमित भूमि अवाप्ति होने से प्रक्रिया तेज़ी से पूरी होने की संभावना है। इसके बाद टेंडर जारी कर कार्यादेश दिया जाएगा। रेलवे सूत्रों के अनुसार उमरड़ा देबारी रेलखंड का कार्य शुरू होने के बाद लगभग तीन वर्षो में पूरा कर लिया जाएगा। परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण कार्य देबारी घाटा स्थित माता मंदिर के पास किया जाएगा जहाँ मौजूदा टनल के सामानांतर करीब 550 मीटर लंबी नई टनल का निर्माण होगा। उल्लेखनीय है कि रेल मंत्रालय ने इस परियोजना को दिसंबर 2025 में स्वीकृति प्रदान की थी।  इसके बाद सर्वे कार्य पूरा किया गया। सर्वे पूर्ण होते ही रेलवे ने भूमि अवाप्ति के लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेज दिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार आगामी 5 से 6 महीने में दोहरीकरण का कार्य शुरू होने की संभावना है।  इस परियोजना को 467 करोड़ रुपए की लागत से पूरा किया जाएगा।

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 3071 रुपए पार
उदयपुर। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी वृद्धि की गई है। 19 किग्रा वाला कॉमर्शियल एलपीजी  सिलेंडर 1 मई से 994 रुपए तक महंगा हो गया है। वहीँ  5 किलो एलपीजी सिलेंडर 261 रुपए हुआ महंगा हो गया है। जबकि घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जानकारी के अनुसार 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, इससे शुक्रवार से  इसकी कीमत 3,071.50 रुपए हो गई है, जो की पहले 2078 रुपए में मिलता था। वहीं, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बता दें कि 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में हुई इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर रेस्टोरेंट, होटल, बेकरी और अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा। जो अपने दैनिक कार्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर रहते हैं। उद्योग से जुड़े लोग अक्सर बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं, जिसका असर आने वाले हफ्तों में भोजन और डाइनिंग की कीमतों में देखने को मिल सकता है। वहीं 5 किलोग्राम वाला फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडर, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से छोटे प्रतिष्ठान और सीमित व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। उसमें सब्सिडी नहीं दिया जाता है। इसकी कीमत बाजार दरों के करीब होती है, जिससे यह वैश्विक उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।