सत्संग में बैठने से विचारों का शमन होता है: पुष्कर दास महाराज
1 min read

सत्संग में बैठने से विचारों का शमन होता है: पुष्कर दास महाराज

– विवेक पार्क में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भक्ति का उल्लास, भजनों पर झूमीं महिलाएं
उदयपुर, 26 अप्रैल। विवेक नगर सेक्टर-3 स्थित विवेक पार्क में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कथा के दौरान महिलाओं ने भजनों पर नृत्य कर भक्ति रस का आनंद लिया।
कथा व्यास श्री पुष्कर दास जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि “भीड़ में सत्य नहीं होता, भजन एकांत में ही संभव है।” उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य जितनी उंगलियां मोबाइल पर चलाता है, उतनी माला पर चलाए, तो उसका कल्याण निश्चित है। जीवन में रामरस आने से जीवन पूर्ण रूप से परिवर्तित हो जाता है।
महाराज ने कहा कि कथा और सत्संग व्यक्ति को पाप से दूर रखकर सद्मार्ग की ओर ले जाते हैं। कथा के श्रवण से मन की बुराइयां समाप्त होती हैं और जीवन जीने की सही दिशा मिलती है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग कथा में शरीर से तो उपस्थित रहते हैं, लेकिन उनका मन कहीं और भटकता रहता है। विचारों की भीड़ हर जगह रहती है, किन्तु सत्संग में बैठने से इन विचारों का शमन होता है।
उन्होंने भगवान शंकर के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि कैलाश पर्वत पर वे माता पार्वती के साथ श्रीराम नाम का जप करते हैं। जो व्यक्ति सत्य को धारण करता है, वही वास्तव में ईश्वर को प्राप्त करता है। संत सूरदास जी का उदाहरण देते हुए महाराज ने कहा कि अपार भक्ति के बावजूद उनमें अहंकार का अभाव था।
कथा के प्रसंगों में यशोदा मैया द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट प्रेम का वर्णन करते हुए बताया कि ईश्वर के समक्ष सांसारिक वैभव का कोई मूल्य नहीं है। पूतना वध, शकटासुर वध तथा माखन चोरी की लीलाओं का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के कोमल मन रूपी माखन को चुराया, न कि केवल दूध के माखन को। इसी प्रकार मटकी फोड़ने की लीला अहंकार के विनाश का प्रतीक है तथा चीरहरण लीला वासना रूपी आवरण को दूर करने का संदेश देती है।
अंत में महाराज ने “वृन्दावन जाऊंगी, सही ना लौट के आऊंगी” भजन प्रस्तुत किया, जिस पर सभी भक्त झूम उठे और भक्ति में लीन हो गए।
कथा संयोजक विट्ठल वैष्णव ने बताया कि सात दिवसीय इस कथा का समापन सोमवार को सायं 3:30 से 6:30 बजे तक महाआरती के साथ किया जाएगा।