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हाथ—पैर कट गए तब भी डकैतों से भिड़ गया था जवान मानसिंह
बैंक लूट को बचाते हुए वीरगति पाने वाले बांसवाड़ा पुलिस के सिपाही को 44 साल बाद मिला शहादत का सम्मान
उदयपुर, 16 अप्रैल: राजस्थान पुलिस के इतिहास में दर्ज एक ऐसी वीरगाथा, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं। एक जांबाज सिपाही, जिसने बैंक लूटने आए हथियारबंद डकैतों के सामने अकेले मोर्चा संभाला। तलवारों से दोनों हाथ कट गए, लेकिन हौसला नहीं टूटा। लहूलुहान हालत में भी वह डटा रहा और डकैतों को बैंक लूटे बिना भागने पर मजबूर कर दिया। यह अद्भुत साहस था कॉन्स्टेबल मानसिंह का, जिन्हें अब उनकी शहादत के 44 साल बाद सम्मान मिला है।
राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस पर बांसवाड़ा पुलिस लाइन में शहीद कॉन्स्टेबल मानसिंह को मरणोपरांत विशेष सम्मान देकर उनकी बहादुरी को नमन किया गया। यह सम्मान उनके बेटे करण सिंह की आंखों में गर्व और पीड़ा दोनों एक साथ ले आया। करण सिंह ने कहा कि उस रात डकैतों ने उनके पिता के दोनों हाथ काट दिए थे, लेकिन वे आखिरी सांस तक लड़ते रहे।
हथियारबंद डकैतों से भिड़ गया था मानसिंह
यह घटना 3 मार्च 1982 की है, जब मानसिंह घाटोल चौकी में तैनात थे। देर रात सूचना मिली कि बैंक ऑफ बड़ौदा में 8 से 10 हथियारबंद डकैत घुस आए हैं। अकेले गश्त पर मौजूद मानसिंह ने मदद का इंतजार नहीं किया और सीधे बैंक पहुंचकर डकैतों को ललकार दिया। उन्होंने एक डकैत को दबोच लिया, लेकिन बाकी बदमाशों ने तलवारों से हमला कर दिया। दोनों हाथ कट जाने के बावजूद मानसिंह लड़ते रहे। उनकी बहादुरी देखकर डकैत घबरा गए और भाग निकले, लेकिन कुछ देर बाद मानसिंह वीरगति को प्राप्त हो गए।
इस शहादत ने उनके परिवार को भी तोड़ दिया। दो महीने में छोटी बहन और फिर मां की भी मौत हो गई। उस समय करण सिंह महज पांच साल के थे। मामा ने दोनों भाइयों को पाला। आज करण सिंह स्वयं पुलिस में चौकी प्रभारी हैं, जबकि उनके बड़े भाई प्रशासनिक सेवा में हैं।
बांसवाड़ा एसपी ने पुराना रिकार्ड खंगाला और जवान की वीरता को लाए सामने
बांसवाड़ा एसपी सुधीर जोशी ने पुराने रिकॉर्ड खंगालकर इस वीरता को फिर सामने लाया और पुलिस लाइन के पार्क का नाम ‘शहीद मानसिंह बालोद्यान’ रखा। पुलिस लाइन में उनकी प्रेरणा गैलरी भी बनाई गई।चार दशक बाद मिला यह सम्मान सिर्फ एक सिपाही को श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि खाकी के उस जज्बे को सलाम है, जो जान देकर भी कर्तव्य निभाना जानता है।
