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मजदूर दिवस पर ग्रामीण-शहरी मजदूरी असमानता पर उठी सशक्त आवाज
उदयपुर। सामाजिक सुरक्षा फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (नई दिल्ली) की उदयपुर शाखा, दत्तोपंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड (श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार) क्षेत्रीय निदेशालय उदयपुर, नूपुर नारी सेवा संस्थान एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के संयुक्त तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर शुक्रवार को शहर में श्रमिकों के अधिकारों एवं श्रम संहिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशक पुनीत गौतम ने श्रम संहिता (लेबर कोड), श्रमिकों के अधिकारों तथा ई-श्रम कार्ड सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्रमिकों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुँचाना ही इस प्रकार के कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य है। सामाजिक सुरक्षा फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव सौरभ गुप्ता ने मजदूर दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। नूपुर नारी सेवा संस्थान की सचिव एडवोकेट मंजू सोलंकी ने श्रमिकों की जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में मजदूरी की असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब एक ही परिश्रम, एक ही पसीना और एक ही संघर्ष है, तो मजदूरी में यह भेदभाव क्यों? ग्रामीण मजदूर आज भी अपने श्रम का उचित मूल्य पाने से वंचित हैं। यह केवल आर्थिक असमानता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रश्न है। विशिष्ट अतिथि उदयपुर जिला एवं सेशन न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं श्रम विशेषज्ञ प्रदीप पालीवाल रहे। इस अवसर पर सामाजिक सुरक्षा फेडरेशन ऑफ इंडिया के जिलाध्यक्ष गिरिराज माली, नूपुर नारी सेवा संस्थान की संरक्षक कंचन देवी राजपूत, सचिव एडवोकेट मंजू सोलंकी, कोषाध्यक्ष अनीता सोनी, सामाजिक सुरक्षा फेडरेशन के झाड़ोल ब्लॉक अध्यक्ष गौरीशंकर पारगी, प्रधानमंत्री दिव्यांग केंद्र के संयोजक लोकेश रेबारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुशीला पूर्वया, रेखा शर्मा, प्रेमलता श्रीमाली, यशवंता चौहान, रिंकू सेन, आशा श्रीमाली, केसरबाई, नर्मदा बाई, मोनिका सहित अनेक कार्यकर्ता एवं श्रमिक भाई-बहन उपस्थित रहे।
