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पट्टो के लिए डबल इंजन सरकार का आदिवासियों पर डबल हमला

उदयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकार की मान्यता) 2006 के तहत फरवरी, 2026 तक वन अधिकार के पट्टो के लिए प्राप्त 1,18,675 आवेदन में से 51,775 आवेदन ही स्वीकार कर 66,213 आवेदनों को अस्वीकार करने से डबल इंजन सरकार का आदिवासियों पर डबल हमला करने का चरित्र उजागर होता है। माकपा जिला सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने बताया कि माकपा के सीकर से लोकसभा सांसद अमराराम ने पिछले दिनों लोकसभा में राजस्थान में वन अधिकार के पट्टो के लिए प्राप्त आवेदनों, स्वीकृत एवं अस्वीकृत आवेदनों, अस्वीकृत आवेदनों पर पुनः विचार करने और अस्वीकृत आवेदनों पर पुनः विचार नहीं करने का कारण जानने का प्रश्न उठाया तो जनजाति कार्य मंत्रालय की तरफ से 2 अप्रैल को जवाब देकर राजस्थान में दिये गये पट्टों का आंकड़ा बताने के साथ उदयपुर जिले में प्राप्त आवेदन 22533, स्वीकृत आवेदन 12758 एवं अस्वीकृत आवेदन 9775 होना बताया और इसी तरह के आंकड़े सभी जिलों के बताये। इस जवाब में यह भी बताया गया कि वर्तमान में अस्वीकृत आवेदनों की समीक्षा विचाराधीन नहीं है। सिंघवी ने कहा कि वन अधिकार के तहत 25 बीघा वन भूमि तक पट्टे देने का अधिकार है, लेकिन जिन लोगों को भी पट्टे दिये गये है, वे भी मात्र उनके मकान एवं आसपास के थोडे से क्षेत्र के लगभग 4 बीघा वन भूमि तक का है। जबकि कब्जा कई बीघा भूमि पर है। सिंघवी ने कहा कि उदयपुर, डूंगरपुर में भाजपा, कांग्रेस पार्टी, बाप पार्टी के सांसद, विधायक एवं जन प्रतिनिधि है, लेकिन उन्होंने संसद या विधानसभा में कभी आदिवासियों के वन अधिकार के पट्टे और उनकी वन भूमि से जबरन गैर कानूनी बेदखली के मुद्दे नहीं उठा, सिर्फ अपने आकाओं की कठपूतियां होना ही साबित किया हैै, जबकि कम्युनिष्टो में कोई भी जन प्रतिनिधि आदिवासी हो या गैर आदिवासी, दलित हो या गैर दलित, पिछडा हो या गैर पिछडा तो भी वह हमेशा आदिवासियों, दलितों, पिछडो, गरीबों, वंचितों के हक की आवाज सड़क और संसद तक उठाते रहे है। सिंघवी ने कहा कि अगर हमारे यहां के जन प्रतिनिधियों में थोडी भी शर्म बची है तो आदिवासीयों के हिन्दु, गैर-हिन्दु होने के जैसे मुद्दो को छोड़ उन्हें आदिवासीयों के वन भूमि पर दावों के आवेदन पर पुनः विचार करने और विचाराधीन पडे आवेदनों पर उन्हें वन भूमि पर जितना कब्जा है, उतनी भूमि के पट्टे देने की अगुवाई करनी चाहिए। सिंघवी ने कहा कि माकपा और उसके संगठन हमेशा वन भूमि के पट्टे दिलाने और बेदखली के खिलाफ हमेशा संघर्ष करते रहे है और आने वाले दिनों में इस संघर्ष को और भी तीखा किया जावेगा।