पेसिफिक विवि: अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में व्यापार में ईएसजी और एआई अपनाने पर गहन विमर्श
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पेसिफिक विवि: अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में व्यापार में ईएसजी और एआई अपनाने पर गहन विमर्श

उदयपुर। व्यापार में ईएसजी और एआई के उपयोग से सफलता को किस तरह बढ़ाया जा सकता है इस विषय पर चर्चा करने के लिए पेसिफिक यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट द्वारा आयोजित 17वीं अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस “रेडिफाइनिंग बिजनेस पैराडाइम थ्रू एनवायरनमेंटल, सोशल एंड गवर्नेंस (ईएसजी) एंड एआई फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड इंक्लूसिविटी” सफलता व सारपूर्वक संपन्न हुई। इस कॉन्फ्रेंस में 400 से अधिक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। 11 ट्रैक्स में शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें ईएसजी, एआई, नवाचार, समावेशन और सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल्स पर सार्थक चर्चाएं हुईं। उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि राजस्थान विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कहा कि ईएसजी और एआई का संयोजन व्यवसायों को न केवल टिकाऊ बनाएगा, बल्कि सामाजिक समावेशन को मजबूत करेगा। यह कॉन्फ्रेंस उद्योग जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। विशिष्ट अतिथि यूनेस्को एमजीईआईपी एशिया पेसिफिक चेयरमैन एवं प्लानिंग व कंट्रोल प्रेसिडेंट प्रो. बी.पी. शर्मा ने कहा कि पर्यावरण, समाज और सुशासन पर आधारित एआई-संचालित रणनीतियां वैश्विक चुनौतियों का समाधान हैं। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह अनिवार्य है। सम्मानित अतिथि यूसीसीआई प्रेसीडेंट प्रेसिडेंट मनीष गलुंडिया ने जोर दिया कि उदयपुर जैसे शहरों में स्थानीय उद्योगों को ईएसजी अपनाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना चाहिए। यह कॉन्फ्रेंस व्यवसाय के भविष्य को जिम्मेदार, टिकाऊ और तकनीक-सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अध्यक्षता करते हुए पेसिफिक यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट प्रो. हेमंत कोठारी ने कहा कि 400  से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी इस विषय की प्रासंगिकता दर्शाती है। कॉन्फ्रेंस ने व्यवसायिक पैराडिग्म को फिर से परिभाषित करने के रोडमैप तैयार किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि व्यवसाय तात्कालिक लाभ से आगे बढ़कर पर्यावरण, समाज और सुशासन पर फोकस करें। यह       दीर्घकालिक विकास की कुंजी है। आयोजन निदेशक एवं डीन फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट प्रो. दीपिन माथुर ने  कहा यह मंच शिक्षाविदों, उद्योगजनों और नीति-निर्माताओं को एकजुट करने में सफल रहा। प्रस्तुत पेपर्स जर्नल्स और एडिटेड बुक्स में प्रकाशित होंगे। पुराने तरीकों को एआई से जोड़कर बेहतर परिणाम संभव हैं। उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में बचाये रखने के लिए एआई अपनाना ही होगा । कॉन्फ्रेंस के विभिन्न सत्रों में एआई के माध्यम से ईएसजी रिपोर्टिंग, रिस्क असेसमेंट और सस्टेनेबिलिटी स्ट्रैटजीज पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। एआई डेटा एनालिटिक्स से ईएसजी स्कोरिंग को रीयल-टाइम बनाया जा सकता है, जो भारतीय बीआरएसआर जैसे मानकों के अनुरूप है। अन्य ट्रैक में समावेशी विकास पर फोकस रहा, जहां एआई को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उपयोग करने के केस स्टडीज पेश किए गए। आयोजन सचिव डॉ. नरेन्द्र चावड़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।