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बांसवाड़ा में पीडब्ल्यूडी ठेकेदारों का गुस्सा फूटा, गेट बंद किए
बांसवाड़ा, 15 अप्रैल: बांसवाड़ा में बुधवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय के बाहर ठेकेदारों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। लंबित भुगतान, बढ़ती लागत और कथित भ्रष्टाचार से परेशान संवेदकों ने मुख्य गेट पर धरना देते हुए उसे जाम कर दिया। जिला ठेकेदार एसोसिएशन के बैनर तले जुटे ठेकेदारों ने जमकर नारेबाजी की और विभाग के खिलाफ ‘ताला बंदी’ जैसा माहौल बना दिया।
धरने के दौरान ठेकेदारों और विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। ठेकेदार मुख्य बिल्डिंग की सीढ़ियों पर ही बैठ गए और अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे महीनों से बकाया बिलों के भुगतान को टाल रहे हैं। ठेकेदारों ने दो-टूक कहा कि अधिकारी फाइलों में उलझे रहते हैं, जबकि जमीनी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
10 सूत्री मांगों में भुगतान और पारदर्शिता प्रमुख
एसोसिएशन के सचिव देवेंद्रपाल सिंह ने बताया कि अधिशासी अभियंता को 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें बकाया भुगतान जल्द जारी करने, टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और बढ़ती लागत के अनुसार भुगतान करने की मांग शामिल है। उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते डामर, डीजल और स्टील की कीमतें तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं, जिससे पुराने रेट पर काम करना घाटे का सौदा बन गया है।
ट्रेजरी प्रक्रिया पर सवाल, भ्रष्टाचार के आरोप
ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि ट्रेजरी में बिल पास कराने की प्रक्रिया जटिल और भ्रष्टाचार से ग्रस्त है, जिसके कारण महीनों तक भुगतान अटका रहता है। इसके अलावा बिजली, वन विभाग और पेयजल पाइपलाइन से जुड़े विवादों का समाधान विभाग को करना चाहिए, लेकिन जिम्मेदारी ठेकेदारों पर डाल दी जाती है।
NOC में देरी से बढ़ रही लागत
संवेदकों का कहना है कि विभिन्न विभागों से एनओसी मिलने में 2 से 3 साल तक लग जाते हैं, जिससे प्रोजेक्ट की लागत दोगुनी हो जाती है। निरीक्षण के दौरान छोटी-छोटी कमियों पर पूरे प्रोजेक्ट का भुगतान रोक दिया जाता है, जबकि केवल संबंधित कार्य का भुगतान रोका जाना चाहिए।
ब्लैकलिस्ट की धमकी से नाराजगी
ठेकेदारों ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग उन्हें ‘डिबार’ और ‘ब्लैकलिस्ट’ करने की धमकी देकर मानसिक दबाव बना रहा है। कुछ संवेदकों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप भी लगाए गए। प्रदर्शन के दौरान ठेकेदारों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
