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आचार्य अचलमुक्ति सागर जी की सूरिमंत्र साधना – आयड़ जैन तीर्थ
उदयपुर, 10 अक्टूबर। तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ जैन तीर्थ में माधव मार्तण्ड आचार्य डॉ. मुक्तिसागर सूरीश्वरजी महाराज की पावन निश्रा में उनके शिष्य रत्न, जाप-ध्यान निष्ठ आचार्य अचल मुक्ति सागर सूरीश्वरजी महाराज सूरिमंत्र की चतुर्थ पीठिका यक्षराज की आठ दिवसीय साधना में लीन हैं। जप, तप, मौन और कठोर आत्मसंयम से युक्त यह साधना जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपरा एवं साधना संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है।
जैन श्वेतांबर महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि प्राय: जैनाचार्य अपनी आचार्य पदवी प्राप्त करने के पश्चात सूरिमंत्र की पांचों पीठिकाओं की जप-तप साधना करते हैं। आचार्य अचल मुक्ति सागर सूरीश्वरजी महाराज पूर्व में पांच में से तीन पीठिकाओं की साधना पूर्ण कर चुके हैं। वर्तमान में वे चतुर्थ पीठिका की साधना कर रहे हैं। इसके पश्चात शरद पूर्णिमा से पंचम पीठिका की 16 दिवसीय कठिन साधना प्रारंभ करेंगे।
– प्रतिदिन 8 से 10 घंटे जाप, चौबीसों घंटे मौन
नाहर ने बताया कि सूरिमंत्र साधना अत्यंत कठिन नियमों, संयम और अनुशासन के साथ संपन्न होती है। इस साधना में लीन आचार्य भगवंतों को आयंबिल आदि तपश्चर्या के साथ प्रतिदिन लगभग 8 से 10 घंटे तक मंत्र जाप करना होता है। साधना के दौरान चौबीसों घंटे मौन का पालन किया जाता है। मौन, ध्यान, मंत्र जाप और तप के समन्वय से संपन्न यह आध्यात्मिक आराधना साधक की आत्मशुद्धि एवं साधना की दृढ़ता का प्रतीक मानी जाती है। जैन परंपरा के अनुसार, ऐसी साधना जैन शासन की प्रभावना और धर्मकार्यों में आध्यात्मिक रूप से सहायक होती है।
– शरद पूर्णिमा से प्रारंभ होगी 16 दिवसीय कठिन आराधना
आसो सुद पूर्णिमा अर्थात शरद पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाली पंचम पीठिका की 16 दिवसीय साधना विशेष कठिन मानी जाती है। इसमें साधक को अत्यंत कठोर नियमों का पालन करना होता है। साधना अवधि में स्त्री का मुख देखना भी निषिद्ध रहता है तथा प्रतिदिन लगभग 12 से 14 घंटे मंत्र जाप किया जाता है। निरंतर तप, मौन और एकाग्रता के माध्यम से साधना की पूर्णता की ओर अग्रसर हुआ जाता है। इस साधना की पूर्णाहुति दीपावली के दूसरे दिन, नववर्ष के शुभारंभ पर गौतमस्वामी भगवंत के महापूजन के साथ होगी। इस अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
– आयड़ जैन तीर्थ में बनाया भव्य जाप मंदिर
सूरिमंत्र की इस विशिष्ट साधना के लिए आयड़ जैन तीर्थ स्थित उपाश्रय हॉल में भव्य जाप मंदिर का निर्माण किया गया है। यहां निर्धारित विधि-विधान, तपश्चर्या और अनुशासन के साथ साधना संपन्न हो रही है। आचार्य अचलमुक्ति सागर सूरीश्वरजी महाराज की यह साधना जैन समाज में आध्यात्मिक चेतना, धर्मनिष्ठा और तप-त्याग की परंपरा के प्रति श्रद्धा को और प्रगाढ़ करने वाली है।
इस अवसर पर भोपाल सिंह परमार, भोपाल सिंह नाहर, कुलदीप नाहर, चन्द्र सिंह, अशोक जैन, राजेंद्र जावरिया, प्रकाश नागौरी, हेमंत सिंघवी, राजेश जावरिया, दिनेश बापना, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, चतर सिंह पामेच, सतीश कच्छारा, दिनेश भंडारी, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया, कुलदीप मेहता सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
