राजस्थान की सैन्य परम्परा, वीरता और रणनीति पर हुई गहन चर्चा
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राजस्थान की सैन्य परम्परा, वीरता और रणनीति पर हुई गहन चर्चा

बप्पा रावल सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ

उदयपुर। इतिहास विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय एवं महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में बप्पा रावल सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ। संगोष्ठी का विषय “राजस्थान की सैन्य परम्परा एवं इतिहास: वीरता, रणनीति और सांस्कृतिक विरासत” रखा गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ विभागाध्यक्ष प्रो. दिग्विजय भटनागर के स्वागत उद्बोधन से हुआ। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. मनीष श्रीमाली ने विषय प्रवर्तन करते हुए संगोष्ठी की रूपरेखा एवं उद्देश्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर हल्दीघाटी का युद्ध पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया।

मुख्य अतिथि उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने अपने संबोधन में मेवाड़ की धर्म, कर्म, भक्ति और बलिदान की परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने मेवाड़ के विभिन्न क्षेत्रों की ऐतिहासिक महत्ता बताते हुए दक्षिण राजस्थान की भील संस्कृति के सैन्य ज्ञान को भी महत्वपूर्ण बताया।

मुख्य वक्ता प्रख्यात सैन्य इतिहास विशेषज्ञ प्रो. रविन्द्र कुमार शर्मा ने राजस्थान और मेवाड़ की सैन्य विरासत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने महाराणा प्रताप से जुड़े विभिन्न शोध विषयों, उनकी आतिथ्य परंपरा तथा अकबर द्वारा प्रताप की प्रशंसा के संदर्भों को भी प्रस्तुत किया। साथ ही नवीन इतिहास लेखन की आवश्यकता पर बल देते हुए ‘प्रताप पीठ’ स्थापित करने की मांग रखी।

विशेष अतिथि प्रो. शिव कुमार मिश्रा ने राजस्थान के विभिन्न युद्धों का उल्लेख करते हुए पृथ्वीराज चौहान और महाराणा सांगा से संबंधित नए ऐतिहासिक संदर्भ साझा किए।

वहीं, विशिष्ट अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल एन.के. सिंह ने वर्तमान सामरिक परिप्रेक्ष्य में दिवेर का युद्ध और हल्दीघाटी युद्ध की रणनीतियों, छापामार युद्ध पद्धति तथा युद्धों में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कला महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. मदनसिंह राठौड़ ने भारतीय संस्कृति में मातृभूमि के लिए बलिदान, क्षत्रिय परम्परा और युद्ध नीति के महत्व को रेखांकित किया तथा मारवाड़ की गौरवमयी शौर्य परंपरा का उल्लेख किया।

अंत में प्रो. प्रतिभा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।